महाभारत 3.238.41
सेनाजीवाश्च ये राज्ञां विषये सन्ति मानवाःतैः संगम्य नृपार्थाय यतितव्यं यथातथम्
senājīvāśca ye rājñāṃ viṣaye santi mānavāḥtaiḥ saṃgamya nṛpārthāya yatitavyaṃ yathātatham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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