महाभारत 3.238.48
नोत्सहे जीवितुमहं त्वद्विहीनो नरर्षभप्रायोपविष्टस्तु नृप राज्ञां हास्यो भविष्यसि
notsahe jīvitumahaṃ tvadvihīno nararṣabhaprāyopaviṣṭastu nṛpa rājñāṃ hāsyo bhaviṣyasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें