महाभारत 3.241.20
एवमुक्तस्ततः कर्णो राजानमिदमब्रवीत्तवाद्य पृथिवीपाला वश्याः सर्वे नृपोत्तम
evamuktastataḥ karṇo rājānamidamabravīttavādya pṛthivīpālā vaśyāḥ sarve nṛpottama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें