महाभारत 3.245.13
सुखदुःखे हि पुरुषः पर्यायेणोपसेवतेनात्यन्तमसुखं कश्चित्प्राप्नोति पुरुषर्षभ
sukhaduḥkhe hi puruṣaḥ paryāyeṇopasevatenātyantamasukhaṃ kaścitprāpnoti puruṣarṣabha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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