महाभारत 3.245.24
मान्यान्मानयिता जन्म कुले महति विन्दतिव्यसनैर्न तु संयोगं प्राप्नोति विजितेन्द्रियः
mānyānmānayitā janma kule mahati vindativyasanairna tu saṃyogaṃ prāpnoti vijitendriyaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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