महाभारत 3.245.2
फलमूलाशनास्ते हि सुखार्हा दुःखमुत्तमम्प्राप्तकालमनुध्यान्तः सेहुरुत्तमपूरुषाः
phalamūlāśanāste hi sukhārhā duḥkhamuttamamprāptakālamanudhyāntaḥ sehuruttamapūruṣāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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