महाभारत 3.245.34
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्व्रीहिद्रोणपरित्यागाद्यत्फलं प्राप मुद्गलः
atrāpyudāharantīmamitihāsaṃ purātanamvrīhidroṇaparityāgādyatphalaṃ prāpa mudgalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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