महाभारत 3.245.5
संस्मरन्परुषा वाचः सूतपुत्रस्य पाण्डवःनिःश्वासपरमो दीनो बिभ्रत्कोपविषं महत्
saṃsmaranparuṣā vācaḥ sūtaputrasya pāṇḍavaḥniḥśvāsaparamo dīno bibhratkopaviṣaṃ mahat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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