महाभारत 3.246.6दर्शं च पौर्णमासं च कुर्वन्विगतमत्सरःदेवतातिथिशेषेण कुरुते देहयापनम्darśaṃ ca paurṇamāsaṃ ca kurvanvigatamatsaraḥdevatātithiśeṣeṇa kurute dehayāpanamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें