महाभारत 3.247.13
तैजसानि शरीराणि भवन्त्यत्रोपपद्यताम्कर्मजान्येव मौद्गल्य न मातृपितृजान्युत
taijasāni śarīrāṇi bhavantyatropapadyatāmkarmajānyeva maudgalya na mātṛpitṛjānyuta
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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