महाभारत 3.247.38
देवदूत नमस्तेऽस्तु गच्छ तात यथासुखम्महादोषेण मे कार्यं न स्वर्गेण सुखेन वा
devadūta namaste'stu gaccha tāta yathāsukhammahādoṣeṇa me kāryaṃ na svargeṇa sukhena vā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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