महाभारत 3.251.4
दर्शनादेव हि मनस्तया मेऽपहृतं भृशम्तां समाचक्ष्व कल्याणीं यदि स्याच्छैब्य मानुषी
darśanādeva hi manastayā me'pahṛtaṃ bhṛśamtāṃ samācakṣva kalyāṇīṃ yadi syācchaibya mānuṣī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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