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महाभारत 3.252.16
जनार्दनस्यानुगा वृष्णिवीरा; महेष्वासाः केकयाश्चापि सर्वेएते हि सर्वे मम राजपुत्राः; प्रहृष्टरूपाः पदवीं चरेयुः
janārdanasyānugā vṛṣṇivīrā; maheṣvāsāḥ kekayāścāpi sarveete hi sarve mama rājaputrāḥ; prahṛṣṭarūpāḥ padavīṃ careyuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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