महाभारत 3.255.30
प्रच्छाद्य पृथिवीं तस्थुः सर्वमायोधनं प्रतिशरीराण्यशिरस्कानि विदेहानि शिरांसि च
pracchādya pṛthivīṃ tasthuḥ sarvamāyodhanaṃ pratiśarīrāṇyaśiraskāni videhāni śirāṃsi ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें