महाभारत 3.255.37
अर्जुन उवाच · arjuna uvāca
यस्यापचारात्प्राप्तोऽयमस्मान्क्लेशो दुरासदःतमस्मिन्समरोद्देशे न पश्यामि जयद्रथम्
yasyāpacārātprāpto'yamasmānkleśo durāsadaḥtamasminsamaroddeśe na paśyāmi jayadratham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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