महाभारत 3.255.41
यमाभ्यां सह राजेन्द्र धौम्येन च महात्मनाप्राप्याश्रमपदं राजन्द्रौपदीं परिसान्त्वय
yamābhyāṃ saha rājendra dhaumyena ca mahātmanāprāpyāśramapadaṃ rājandraupadīṃ parisāntvaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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