महाभारत 3.255.46
भार्याभिहर्ता निर्वैरो यश्च राज्यहरो रिपुःयाचमानोऽपि संग्रामे न स जीवितुमर्हति
bhāryābhihartā nirvairo yaśca rājyaharo ripuḥyācamāno'pi saṃgrāme na sa jīvitumarhati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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