महाभारत 3.255.49
द्रौपदीमनुशोचद्भिर्ब्राह्मणैस्तैः समागतैःसमियाय महाप्राज्ञः सभार्यो भ्रातृमध्यगः
draupadīmanuśocadbhirbrāhmaṇaistaiḥ samāgataiḥsamiyāya mahāprājñaḥ sabhāryo bhrātṛmadhyagaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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