महाभारत 3.255.53
इदमत्यद्भुतं चात्र चकार पुरुषोऽर्जुनःक्रोशमात्रगतानश्वान्सैन्धवस्य जघान यत्
idamatyadbhutaṃ cātra cakāra puruṣo'rjunaḥkrośamātragatānaśvānsaindhavasya jaghāna yat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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