महाभारत 3.255.7गजं तु सगजारोहं पदातींश्च चतुर्दशजघान गदया भीमः सैन्धवध्वजिनीमुखेgajaṃ tu sagajārohaṃ padātīṃśca caturdaśajaghāna gadayā bhīmaḥ saindhavadhvajinīmukheइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें