महाभारत 3.256.12
एवमस्त्विति तं राजा कृच्छ्रप्राणो जयद्रथःप्रोवाच पुरुषव्याघ्रं भीममाहवशोभिनम्
evamastviti taṃ rājā kṛcchraprāṇo jayadrathaḥprovāca puruṣavyāghraṃ bhīmamāhavaśobhinam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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