महाभारत 3.256.28
अजय्यांश्चाप्यवध्यांश्च वारयिष्यसि तान्युधिऋतेऽर्जुनं महाबाहुं देवैरपि दुरासदम्
ajayyāṃścāpyavadhyāṃśca vārayiṣyasi tānyudhiṛte'rjunaṃ mahābāhuṃ devairapi durāsadam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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