महाभारत 3.256.3
समुद्यम्य च तं रोषान्निष्पिपेष महीतलेगले गृहीत्वा राजानं ताडयामास चैव ह
samudyamya ca taṃ roṣānniṣpipeṣa mahītalegale gṛhītvā rājānaṃ tāḍayāmāsa caiva ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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