महाभारत 3.261.10
दीप्यमानं श्रिया वीरं शक्रादनवमं बलेपारगं सर्वधर्माणां बृहस्पतिसमं मतौ
dīpyamānaṃ śriyā vīraṃ śakrādanavamaṃ balepāragaṃ sarvadharmāṇāṃ bṛhaspatisamaṃ matau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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