महाभारत 3.261.14
चिन्तयंश्च महातेजा गुणान्रामस्य वीर्यवान्अभ्यभाषत भद्रं ते प्रीयमाणः पुरोहितम्
cintayaṃśca mahātejā guṇānrāmasya vīryavānabhyabhāṣata bhadraṃ te prīyamāṇaḥ purohitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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