महाभारत 3.261.16
इति तद्राजवचनं प्रतिश्रुत्याथ मन्थराकैकेयीमभिगम्येदं काले वचनमब्रवीत्
iti tadrājavacanaṃ pratiśrutyātha mantharākaikeyīmabhigamyedaṃ kāle vacanamabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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