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महाभारत 3.261.21
सत्यप्रतिज्ञ यन्मे त्वं काममेकं निसृष्टवान्उपाकुरुष्व तद्राजंस्तस्मान्मुच्यस्व संकटात्
satyapratijña yanme tvaṃ kāmamekaṃ nisṛṣṭavānupākuruṣva tadrājaṃstasmānmucyasva saṃkaṭāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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