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महाभारत 3.261.24
मार्कण्डेय उवाच · mārkaṇḍeya uvāca
सा तद्वचनमाज्ञाय परिगृह्य नराधिपम्आत्मनो बलमाज्ञाय तत एनमुवाच ह
sā tadvacanamājñāya parigṛhya narādhipamātmano balamājñāya tata enamuvāca ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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