महाभारत 3.261.30
रामं तु गतमाज्ञाय राजानं च तथागतम्आनाय्य भरतं देवी कैकेयी वाक्यमब्रवीत्
rāmaṃ tu gatamājñāya rājānaṃ ca tathāgatamānāyya bharataṃ devī kaikeyī vākyamabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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