महाभारत 3.261.32
तामुवाच स धर्मात्मा नृशंसं बत ते कृतम्पतिं हत्वा कुलं चेदमुत्साद्य धनलुब्धया
tāmuvāca sa dharmātmā nṛśaṃsaṃ bata te kṛtampatiṃ hatvā kulaṃ cedamutsādya dhanalubdhayā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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