महाभारत 3.261.34
स चारित्रं विशोध्याथ सर्वप्रकृतिसंनिधौअन्वयाद्भ्रातरं रामं विनिवर्तनलालसः
sa cāritraṃ viśodhyātha sarvaprakṛtisaṃnidhauanvayādbhrātaraṃ rāmaṃ vinivartanalālasaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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