महाभारत 3.261.37
ददर्श चित्रकूटस्थं स रामं सहलक्ष्मणम्तापसानामलंकारं धारयन्तं धनुर्धरम्
dadarśa citrakūṭasthaṃ sa rāmaṃ sahalakṣmaṇamtāpasānāmalaṃkāraṃ dhārayantaṃ dhanurdharam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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