महाभारत 3.261.39
रामस्तु पुनराशङ्क्य पौरजानपदागमम्प्रविवेश महारण्यं शरभङ्गाश्रमं प्रति
rāmastu punarāśaṅkya paurajānapadāgamampraviveśa mahāraṇyaṃ śarabhaṅgāśramaṃ prati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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