महाभारत 3.261.40
सत्कृत्य शरभङ्गं स दण्डकारण्यमाश्रितःनदीं गोदावरीं रम्यामाश्रित्य न्यवसत्तदा
satkṛtya śarabhaṅgaṃ sa daṇḍakāraṇyamāśritaḥnadīṃ godāvarīṃ ramyāmāśritya nyavasattadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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