महाभारत 3.261.6
ज्येष्ठो रामोऽभवत्तेषां रमयामास हि प्रजाःमनोहरतया धीमान्पितुर्हृदयतोषणः
jyeṣṭho rāmo'bhavatteṣāṃ ramayāmāsa hi prajāḥmanoharatayā dhīmānpiturhṛdayatoṣaṇaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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