महाभारत 3.261.8
अभिषेकाय रामस्य यौवराज्येन भारतप्राप्तकालं च ते सर्वे मेनिरे मन्त्रिसत्तमाः
abhiṣekāya rāmasya yauvarājyena bhārataprāptakālaṃ ca te sarve menire mantrisattamāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें