महाभारत 3.262.11
तमब्रवीद्दशग्रीवो गच्छ सीतां प्रलोभयरत्नशृङ्गो मृगो भूत्वा रत्नचित्रतनूरुहः
tamabravīddaśagrīvo gaccha sītāṃ pralobhayaratnaśṛṅgo mṛgo bhūtvā ratnacitratanūruhaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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