महाभारत 3.262.7
प्रव्रज्यायां हि मे हेतुः स एव पुरुषर्षभःविनाशमुखमेतत्ते केनाख्यातं दुरात्मना
pravrajyāyāṃ hi me hetuḥ sa eva puruṣarṣabhaḥvināśamukhametatte kenākhyātaṃ durātmanā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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