महाभारत 3.263.13
गर्हयन्नेव रामस्तु त्वरितस्तं समासदत्अपि जीवति वैदेही नेति पश्यामि लक्ष्मण
garhayanneva rāmastu tvaritastaṃ samāsadatapi jīvati vaidehī neti paśyāmi lakṣmaṇa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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