महाभारत 3.263.17
स तावुवाच तेजस्वी सहितौ रामलक्ष्मणौगृध्रराजोऽस्मि भद्रं वां सखा दशरथस्य ह
sa tāvuvāca tejasvī sahitau rāmalakṣmaṇaugṛdhrarājo'smi bhadraṃ vāṃ sakhā daśarathasya ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें