महाभारत 3.263.27
स राममभिसंप्रेक्ष्य कृष्यते येन तन्मुखम्विषण्णश्चाब्रवीद्रामं पश्यावस्थामिमां मम
sa rāmamabhisaṃprekṣya kṛṣyate yena tanmukhamviṣaṇṇaścābravīdrāmaṃ paśyāvasthāmimāṃ mama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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