महाभारत 3.263.2
स ददर्श तदा सीतां रावणाङ्कगतां स्नुषाम्क्रोधादभ्यद्रवत्पक्षी रावणं राक्षसेश्वरम्
sa dadarśa tadā sītāṃ rāvaṇāṅkagatāṃ snuṣāmkrodhādabhyadravatpakṣī rāvaṇaṃ rākṣaseśvaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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