महाभारत 3.264.21
हृतदारो महासत्त्वो रामो दशरथात्मजःतुल्यारिमित्रतां प्राप्तः सुग्रीवेण धनुर्धरः
hṛtadāro mahāsattvo rāmo daśarathātmajaḥtulyārimitratāṃ prāptaḥ sugrīveṇa dhanurdharaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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