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महाभारत 3.264.26
तारां परुषमुक्त्वा स निर्जगाम गुहामुखात्स्थितं माल्यवतोऽभ्याशे सुग्रीवं सोऽभ्यभाषत
tārāṃ paruṣamuktvā sa nirjagāma guhāmukhātsthitaṃ mālyavato'bhyāśe sugrīvaṃ so'bhyabhāṣata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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