महाभारत 3.264.32
उभौ रुधिरसंसिक्तौ नखदन्तपरिक्षतौशुशुभाते तदा वीरौ पुष्पिताविव किंशुकौ
ubhau rudhirasaṃsiktau nakhadantaparikṣatauśuśubhāte tadā vīrau puṣpitāviva kiṃśukau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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