महाभारत 3.266.14
तमब्रवीद्रामवचः सौमित्रिरकुतोभयःस तत्सर्वमशेषेण श्रुत्वा प्रह्वः कृताञ्जलिः
tamabravīdrāmavacaḥ saumitrirakutobhayaḥsa tatsarvamaśeṣeṇa śrutvā prahvaḥ kṛtāñjaliḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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