महाभारत 3.266.2
स दृष्ट्वा विमले व्योम्नि निर्मलं शशलक्षणम्ग्रहनक्षत्रताराभिरनुयातममित्रहा
sa dṛṣṭvā vimale vyomni nirmalaṃ śaśalakṣaṇamgrahanakṣatratārābhiranuyātamamitrahā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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