महाभारत 3.266.32
हनूमत्प्रमुखास्ते तु वानराः पूर्णमानसाःप्रणेमुर्विधिवद्रामं सुग्रीवं लक्ष्मणं तथा
hanūmatpramukhāste tu vānarāḥ pūrṇamānasāḥpraṇemurvidhivadrāmaṃ sugrīvaṃ lakṣmaṇaṃ tathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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