महाभारत 3.266.3कुमुदोत्पलपद्मानां गन्धमादाय वायुनामहीधरस्थः शीतेन सहसा प्रतिबोधितःkumudotpalapadmānāṃ gandhamādāya vāyunāmahīdharasthaḥ śītena sahasā pratibodhitaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें