महाभारत 3.266.52
कः स रामः कथं सीता जटायुश्च कथं हतःइच्छामि सर्वमेवैतच्छ्रोतुं प्लवगसत्तमाः
kaḥ sa rāmaḥ kathaṃ sītā jaṭāyuśca kathaṃ hataḥicchāmi sarvamevaitacchrotuṃ plavagasattamāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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